पश्चिम उत्तर प्रदेश के जनपद मुजफ्फरनगर के कुख्यात भू-माफियाओं पर कसा पुलिस ने शिकंजा

तीन सगे भाईयों समेत कई पर गैंगस्टर में कार्यवाही नहीं करने पर आईजी नाराज
आरोपियों की चल-अचल ंपत्ति की जानकारी करने के भी दिए गए निर्देश
मयूर गुप्ता
देहरादून। पटेलनगर कोतवाली पुलिस द्वारा पश्चिम उत्तर प्रदेश के कुख्यात भू-माफियाओं के खिलाफ अभी तक गैंगस्टर में कोई ठोस कार्यवाही नहीं किए जाने और प्रयवेक्षण अधिकारी द्वारा पुलिस महानिरीक्षक गढ़वाल द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन नहीं करने पर भी आईजी राजीव स्वरूप में नाराजगी जताते हुए आरोपियां के खिलाफ सख्त कार्यवाही करने और उनकी संपत्तियों की जानकारी करने के निर्देश दिए है।
उत्तराखंड बनने के बाद से लेकर अभी तक 25 वर्षां में राज्य में जमीनों के रेट आसमान पर पहुंच गए है। इन सबके लिए जिम्मेदार है पश्चिम उत्तर प्रदेश से आकर उत्तराखंड की अस्थाई राजधानी देहरादून में जमीनों की खरीद-फरोख्त करने वाले। परिश्चम उत्तर प्रदेश के जनपद मुजफ्फरनगर के कस्बा चरथावल के गांव धधड़े के तीन सगे भाईयों और उसकी सीमा से लगते जनपद सहारनपुर निवासी भू-माफियाओं के साले ने देहरादून में आकर लोगों की जमीनों पर कब्जा कर उनके फर्जी दस्तावेजों को तैयार कर उन्हे करोड़ों रुपये में बेच डाला।
जमीन स्वामियों की शिकायत पर जब पटेलनगर कोतवाली पुलिस ने आईएसबीटी पुलिस के साथ मिलकर तीनों भाईयों साजिद,जावेद,महबूब और जनपद सहारनपुर निवासी साजिद के साले अब्दुल अनीस पर जमीनों के फर्जी दस्तावेजों को बनाकर उनकों बेचे जाने के आरोपों की जांच की तो वह सही पाए गए थे जिस पर कोतवाली पटेलनगर पुलिस ने उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज करने के बाद उन्हे सलाखों के पीछे भेज दिया था। बाद में सभी के खिलाफ मुकदमा अपराध संख्या 783/2022 धारा 2/3 गैंगस्टर की कार्यवाही की थी।

भू-माफियाओं के खिलाफ उक्त मुकदमे में कोई ठोस कार्यवाही नहीं किए जाने गैंगस्टर एक्ट से संबंधित पत्रावली की विशेष आख्या पुलिस महानिरीक्षक गढ़वाल परीक्षत्र के कार्यालय को सौंप दी। सूत्र बताते है कि पत्रावली का अवलोकन करने पर आईजी का पारा सातवे आसमान पर पहुंच गया। पुलिस महानिरीक्षक गढ़वाल परीक्षत्र ने तत्काल देहरादून के एसएसपी को एक पत्र लिखा। पत्र के पत्रांक संख्या सीओजी/आर-एसआर-477-मिस-59/22 9307 दिनांक 17 अक्टूबर 2025 को लिखते हुए कहा कि उनके द्वारा उक्त पत्रावली का अध्यन किया गया तो इस बात को बल मिला की आरोपीगण संगठित गिरोह बनाकर अपराध कर रहे है और अवैध धनअर्जित कर रहे है। आईजी ने इस बात को लेकर भी सख्त नाराजगी व्यक्त की कि दिनांक 24/सितंबर 2025 तक प्रयवेक्षण अधिकारी द्वारा आख्या अभी तक प्रेषित नहीं की गई और न ही प्रवेक्षण अधिकारी द्वारा निर्देशों का पालन किया जा रहा है जो कि आपत्तिजनक है।
अपने पत्र में आईजी ने लिखा की अभियोग को पंजीकृत हुए दो वर्ष आठ माह का समय व्यतीत हो चुका है और विगत सात माह के अंदर मुकदमे में कोई खास कार्यवाही नहीं की गई। उन्होंने लिखा कि मुकदमे के विवेचकों द्वारा मात्र खापापूर्ति करने का काम किया गया। अपने पत्र में आईजी ने लिखा की उक्त मुकदमे की विवेचना करने वाले विवेचकों के खिलाफ बरती गई लापरवाही के कारण उनके खिलाफ प्रारंभिक जांच की कार्यवाही की प्रचलित की गई।
अपने पत्र में पुलिस महानिरीक्षक ने लिखा की इतना सबकुछ हो जाने के बावजूद भी विवेचकों द्वारा मुकदमे में किसी प्रकार की रूचि नहीं ली गई जो कि लापरवाही को प्रक्षलित करता है इतना ही नहीं प्रवेक्षण अधिकारी द्वारा भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया है सिस इस बात को बल मिलता है कि प्रवेक्षण अधिकारी अपेन प्रवेक्षण के प्रति गंभीर नहीं है। आईजी ने मुकदमे के आरोपियों के खिलाफ 14/1 की कार्यवाही करवाते हुए उनकी चल-अचल संपत्तियों की जानकारी कर उन्हे गैंगस्टर में निरूध करने के निर्देश दिए।

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