▪️ डीजीपी उत्तराखंड ने 1100 से अधिक स्कूलों के लगभग 1.75 लाख छात्रों से किया सीधा संवाद
▪️ साइबर जागरुकता के प्रति छात्र-छात्राओं ने जोश और उत्साह से लिया भाग
▪️ विद्यार्थियों की मांग पर राजकीय स्कूलों में होगी साइबर सुरक्षा, नशा मुक्ति और सड़क सुरक्षा पर क्लास
श्याम टाइम्स देहरादूनl प्रधानमंत्री के डिजिटल सुरक्षा संदेश और मुख्यमंत्री, उत्तराखंड पुष्कर सिंह धामी के “युवा विद्यार्थी संवाद कार्यक्रम” के तहत उत्तराखण्ड पुलिस द्वारा अपराधों की रोकथाम के साथ-साथ जन-जागरूकता को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। इसी क्रम में विद्यार्थियों एवं युवाओं को प्रारंभिक स्तर से ही साइबर अपराधों एवं डिजिटल जोखिमों के प्रति जागरूक करने तथा उन्हें सुरक्षित एवं जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनाने के उद्देश्य से आज राज्यव्यापी वर्चुअल साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
पुलिस महानिदेशक की उपस्थिति में आयोजित यह कार्यक्रम राजकीय नवोदय विद्यालय, तपोवन, नालापानी, देहरादून स्थित से संचालित किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के लगभग 1100 से अधिक राजकीय विद्यालयों के कक्षा 6 से 12 तक के लगभग 1.75 लाख छात्र-छात्राओं ने वर्चुअल माध्यम से प्रतिभाग किया।
कार्यक्रम के दौरान पुलिस महानिदेशक ने छात्र-छात्राओं से वर्चुवल माध्यम से सीधा संवाद करते हुए ऑनलाइन फ्रॉड स्पेशल मीडिया सेफ्टी हैकिंग आर्टिफिशियल साइबर बुलीइंग एवं साइबर शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया सहित साइबर सुरक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर उनकी जिज्ञासाओं एवं प्रश्नों को सुनकर विद्यार्थियों के प्रश्नों का सरल, सहज एवं व्यावहारिक तरीके से उत्तर देते हुए उनकी शंकाओं का समाधान किया तथा उन्हें दैनिक जीवन में अपनाई जा सकने वाली साइबर सुरक्षा संबंधी आवश्यक सावधानियों एवं सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के प्रति जागरूक किया।
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान समय टेक्नोलॉजी का युग है, जिसमें विद्यार्थियों एवं युवाओं के लिए सीखने, नवाचार करने तथा अपने भविष्य को नई दिशा देने के अनेक अवसर उपलब्ध हैं। साइबर अपराधों की रोकथाम केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेषकर बच्चों एवं युवाओं का साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक होना आवश्यक है। जागरूक एवं सतर्क नागरिक ही साइबर अपराधियों के मंसूबों को प्रभावी ढंग से विफल कर सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को तकनीक का उपयोग केवल मनोरंजन तक सीमित न रखते हुए ज्ञान, शिक्षा, कौशल विकास, नवाचार एवं उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए सकारात्मक एवं जिम्मेदारीपूर्ण तरीके से करने के लिए प्रेरित करते हुए विद्यार्थियों से स्वयं साइबर स्मार्ट सिटिजन बनने तथा अपने माता-पिता, परिवारजनों एवं मित्रों को भी साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने का आह्वान किया। साथ ही, उन्होंने किसी भी सूचना, फोटो अथवा वीडियो को बिना सत्यापन फॉरवर्ड न करने, संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचने तथा डिजिटल माध्यमों का उपयोग करते समय सदैव सतर्क एवं जिम्मेदार रहने की अपील की।
आई आई और डीप फेक से लेकर डिजिटल अरेस्ट तक महत्वपूर्ण विषयों पर जागरूकता सेशन
देहरादून कार्यक्रम में पुलिस महानिरीक्षक, साइबर नीलेश आनंद भरणे, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, एसटीएफ- अजय सिंह एवं अपर पुलिस अधीक्षक, साइबर- शांतनु परासर द्वारा विद्यार्थियों के द्वारा प्रश्नोत्तर एवं संवाद के रोचक सेशन के दौरान* वर्तमान डिजिटल परिदृश्य में साइबर सुरक्षा के महत्व, बदलते साइबर अपराधों तथा उनसे बचाव के व्यावहारिक उपायों के प्रति जागरूक किया गया। अधिकारियों ने सोशल मीडिया सेफ्टी आर्टिफिशियल इन टीम थे फेक डिजिटल अरेस्ट साइबर बुलिंग ऑनलाइन हरासमेंट फेक प्रोफाइल और ऑनलाइन गेमिंगजैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सरल उदाहरणों, पीपीटी एवं वीडियोज के माध्यम से जानकारी देते हुए विद्यार्थियों को सतर्क एवं साइबर सेफ बनने का संदेश दिया। साथ ही साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करने अथवा cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराने की अपील की गयी।
राजकीय स्कूलों में साइबर सुरक्षा, नशा मुक्ति एवं सड़क सुरक्षा पर होंगे कार्यक्रम
देहरादून कार्यक्रम में विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी, साइबर जागरुकता के प्रति उत्साह एवं जिज्ञासा को देखते हुए उनकी मांग पर *पुलिस महानिदेशक महोदय ने राजकीय स्कूलों में साइबर जागरूकता गतिविधियों को नियमित एवं प्रभावी रूप से संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभिन्न आयु वर्ग के विद्यार्थियों के अनुरूप सरल एवं व्यावहारिक जागरूकता कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएं। साइबर सिक्योरिटी ड्रग अवेयरनेस ओं रोड सेफ्टी विषयों पर राज्य एवं जिला स्तर पर वर्चुअल जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थियों को जागरूक कर सुरक्षित एवं जिम्मेदार समाज के निर्माण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।