-सीओ सिटी मुजफ्फरनगर में सिविल लाइन कोतवाली में दर्ज कराया मुकदमा अज्ञात के खिलाफ
श्याम टाइम्स देहरादून:- खालापार कोतवाली के प्रभारी और चौकी इंचार्ज के फर्जी हस्ताक्षर व मोहर का इस्तेमाल कर नकली दस्तावेजों से जमानत कराई गई।
इसके आधार पर आहाद राना को जेल से रिहा कर दिया गया। एसपी सिटी सत्यनारायण प्रजापति ने सीओ सिटी सिद्धार्थ मिश्रा से मामले की जांच कराई। जांच रिपोर्ट आने के बाद मामले में सोमवार रात सिविल लाइन थाने में अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
दरअसल, राना स्टील पर जीएसटी टीम पर हमले के मामले में पूर्व विधायक शाहनवाज राना को जेल जाना पड़ा था। उन्हें कई अन्य मुकदमों का भी सामना करना पड़ा है। जब पूर्व विधायक राना जमानत पर बाहर आए, तो उनके बेटे अब्दुल आहाद राना पर जेल में पिता को मोबाइल पहुंचाने का आरोप लगा।
पुलिस ने आहाद को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। आहाद राना की जमानत मंजूर होने के बाद, दो जमानतियों के दस्तावेज 11 नवंबर 2025 को खालापार कोतवाली भेजे गए थे। हालांकि, पुलिस द्वारा जमानत तस्दीक नहीं की गई, लेकिन 12 नवंबर को आहाद राना को रिहा कर दिया गया।
एसपी सिटी सत्यनारायण प्रजापति ने उच्चाधिकारियों पूरा मामला बताया। इसके बाद सीओ से जांच कराई गई। सीओ सिटी सिद्धार्थ मिश्रा की जांच में सामने आया कि कुछ लोगों ने असली जमानतियों के नकली दस्तावेजों का उपयोग कर जमानत तस्दीक कराई।
डॉक्यूमेंट में खालापार कोतवाली प्रभारी महावीर सिंह चौहान और चौकी प्रभारी की फर्जी मोहर और जाली हस्ताक्षर का इस्तेमाल किया गया। जमानत तस्दीक दस्तावेज पर चौकी प्रभारी का नाम भी गलत दर्ज था।
तथ्यों के आधार पर सीओ सिटी सिद्धार्थ मिश्रा ने सिविल लाइन थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ जमानत तस्दीक में फर्जीवाड़े का मुकदमा दर्ज करा दिया।
एसपी सिटी प्रजापति ने बताया फर्जी दस्तावेजों से जमानत तस्दीक कराकर न्यायालय को गुमराह करने का काम किया गया। यह शिकायत सामने आई तो सीओ सिटी से पूरे मामले की जांच कराई गई। जांच में आने वाले तथ्यों के आधार पर अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। विवेचना में जिसके खिलाफ साक्ष्य मिलेंगे, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।