नीट यूजी 2025 में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एमबीबीएस में प्रवेश प्रकरण में 02 गिरफ्तार

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक परमिंदर सिंह डोभाल ने पत्रकार वार्ता के दौरान दोनों आरोपियों को क्या मीडियाकर्मियों के समक्ष पेश

श्याम टाइम्स देहरादून विगत 13 सितंबर को थाना रायपुर तथा थाना क्लेमेंटाउन पर कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर अलग-अलग अभ्यर्थियों द्वारा अपनी सरकार पोर्टल पर स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनाने हेतु ऑनलाइन आवेदन किये जाने तथा जांच के दौरान उनके द्वारा उपलब्ध कराये गये दस्तावेज फर्जी पाये जाने के सम्बन्ध में प्राप्त तहरीरों के आधार पर थाना रायपुर पर  धारा 318(4) 338/336(2)/340(2) बीएनएस तथा थाना क्लेमेंटाउन पर धारा: 318(4) 338/340(2)/61(2) बीएनएस के तहत अलग-अलग अभियोग पंजीकृत किये गये।

प्रकरण की गम्भीरता के दृष्टिगत सम्पूर्ण प्रकरण की निष्पक्ष जांच एवं गहन परीक्षण हेतु वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून द्वारा श्रीमती जया बलोनी, पुलिस अधीक्षक, ग्रामीण -1 के नेतृत्व में एस०आई०टी० का गठन किया गया।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने बताया कि एसआईटी टीम द्वारा प्रकरण में संलिप्त आरोपियों के विरूद्ध की कार्यवाही करते हुए प्रकरण से जुडे सभी दस्तावेजों को कब्जे मे लिया गया। एसआईटी जांच के दौरान उक्त सभी अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में अंकित पते गलत पाये गये, जिस पर एसआईटी द्वारा सम्बन्धित शिक्षण संस्थानों में जाकर प्रकरण से जुडे सभी दस्तावेजों को कब्जे में लिया गया, जिनके अवलोकन से उक्त अभ्यर्थियों के मूल पतों की जानकारी प्राप्त हुई।

पत्रकार वार्ता के दौरान अपने कार्यालय में मौजूद मीडिया कर्मियों को जानकारी देते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक परमिंदर सिंह डोभाल ने बताया कि प्रकाश में आये साक्ष्यों के आधार पर एसआईटी द्वारा रूपेश पण्डित तथा,  अरविन्द कुमार को पूछताछ हेतु थाना रायपुर पर लाया गया, जिनसे आवश्यक पूछताछ व प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर पुलिस द्वारा उन्हें मौके से गिरफ्तार किया गया।

रूपेश पंडित अपने साथियों के साथ मिलकर पिछले 05 वर्षों से एज्युकेशन कन्सल्टेन्सी का कार्य कर रहा था

देहरादूनl एसआईटी द्वारा पकड़े गए दोनों आरोपियों  से पूछताछ  की गई तो उन्होंने सीट को जानकारी दी कि आरोपी रूपेश पंडित अपने साथियों के साथ मिलकर पिछले 05 वर्षों से एज्युकेशन कन्सल्टेन्सी का कार्य कर रहा था तथा मेरठ में मिकोडो  पाठशाला नाम से एक कम्पनी संचालित कर रहा था, जिसके माध्यम से वह विभिन्न प्राईवेट युनिवर्सिटिज व विदेशों में भी एमबीबीएस, बीटेक, बीसीए, बीबीए, बीकॉम आदि कोर्सों में कमिशन पर एडमिशन दिलवाने का काम करता था।

गिरफ्तार  अरविन्द, रूपेश का पुराना परिचित था तथा पिछले 02-03 सालों से उसे जानता था। अपनी पुत्री परी के एमबीबीएस में दाखिले के लिये उसके द्वारा रूपेश से सम्पर्क किया गया था तथा अपनी पुत्री के साथ अपने 02 अन्य परिचितों के बच्चों को भी एमबीबीएस में एडमिशन दिलाने की बात की थी, जिस पर रूपेश द्वारा अपने साथियों के साथ मिलकर उन्हें स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटे से एडमिशन दिलवाने तथा प्रत्येक एडिमिशन के एवज में 45 लाख रू0 लेने की बात कही थी। तीनो अभ्यर्थियों के परिजनों से रूपेश तथा उसके साथियों द्वारा एडवांस के तौर पर 20-20 लाख रू0 लिये गये थे तथा एमबीबीएस में दाखिले व क्लासों के शुरू होने के बाद बाकी के पैसे देने की बात तय हुई थी।

एसआईटी द्वारा गिरफ्तार किए गए रूपेश पंडित द्वारा अपने साथियों के साथ मिलकर तीनो अभ्यर्थियों के कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनावाये गये थे, जिसके आधार पर उक्त तीनों अभ्यर्थियों द्वारा अलग-अलग मेडीकल कालेजों में एमबीबीएस कोर्स के लिये दाखिला प्राप्त किया था। एसआईटी द्वारा प्रकरण से जुडे सभी पहलुओं की गहनता से विवेचना की जा रही है, उक्त प्रकरण से जुड़े सभी आरोपियो के विरूद्ध सख्त से सख्त कार्यवाही की जायेगी।

 

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