श्याम टाइम्स देहरादूनl रविवार 14 जून की सायं लगभग 5 बजे एसडीआरएफ कंट्रोल रूम, ऋषिकेश के माध्यम से सूचना प्राप्त हुई कि थाना ऋषिकेश क्षेत्रांतर्गत चन्द्रेश्वर नगर श्मशान घाट के समीप गंगा नदी में दो व्यक्ति डूब गए हैं। सूचना प्राप्त होते ही एसडीआरएफ पोस्ट ढालवाला की टीम आवश्यक रेस्क्यू उपकरणों के साथ तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना हुई।
गंगा नदी में डूबने वाले दोनों व्यक्ति पति-पत्नी हैं, जो दिल्ली निवासी बताए जा रहे हैं। जिनके नाममनीष आर्य पुत्र कुंदन आर्य उम्र 30 वर्ष,जानकी पत्नी मनीष उम्र 28 बर्ष
निवासी – जय बिहार नगली उत्तम नगर दिल्ली दोनों अपने अन्य साथियों के साथ ऋषिकेश घूमने हेतु आए हुए थे। घूमने के दौरान वे चन्द्रेश्वर नगर श्मशान घाट क्षेत्र की ओर चले गए तथा गंगा नदी में स्नान करने लगे। स्नान के दौरान नदी की गहराई एवं तेज बहाव की चपेट में आने से दोनों पति-पत्नी नदी में डूब गए।
घटना के दौरान उनके साथ मौजूद एक अन्य साथी ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन वह स्वयं भी डूबने लगा। मौके पर उपस्थित स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए उक्त व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
सूचना मिलते ही त्रिवेणी घाट पर तैनात वाटर रेस्क्यू टीम तत्काल घटनास्थल पर पहुंची तथा बिना विलंब के सर्च अभियान प्रारंभ किया। टीम द्वारा संभावित डूब क्षेत्र में व्यापक खोजबीन की गई, किन्तु काफी प्रयासों के बावजूद प्रारंभिक चरण में कोई सफलता प्राप्त नहीं हो सकी।
इसके उपरांत एसडीआरएफ पोस्ट ढालवाला से डीप डाइविंग टीम को स्कूबा उपकरणों सहित घटनास्थल पर भेजा गया। टीम द्वारा नदी की गहराइयों में उतरकर विस्तृत एवं गहन सर्च ऑपरेशन चलाया गया। लगभग दो घंटे तक चले सघन खोज अभियान के बावजूद डूबे हुए दोनों व्यक्तियों का कोई सुराग नहीं मिल पाया। एसडीआरएफ द्वारा खोज अभियान लगातार जारी रखा गया है।
एसडीआरएफ उत्तराखण्ड सभी पर्यटकों, श्रद्धालुओं एवं स्थानीय नागरिकों से अपील करती है कि वे केवल प्रशासन द्वारा चिन्हित एवं सुरक्षित घोषित स्नान घाटों पर ही स्नान करें। किसी भी अपरिचित अथवा असुरक्षित स्थान पर बिना स्थानीय जानकारी के नदी में प्रवेश न करें। गंगा नदी का जलस्तर एवं जल प्रवाह किसी भी समय अचानक बढ़ सकता है, जिससे गंभीर दुर्घटनाएं घटित हो सकती हैं।
नदी किनारे लगाए गए चेतावनी बोर्डों एवं सुरक्षा निर्देशों का पालन करना प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। थोड़ी सी लापरवाही स्वयं एवं परिवार के लिए अपूरणीय क्षति का कारण बन सकती है।